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Top 10 offbeat destinations in Kumaon Uttarakhand


Top 10 offbeat destinations in Kumaon Uttarakhand in Hindi

आज के इस लेख में हम आपको उत्तराखंड के कुमाऊँ रीजन की दस ऑफबीट डेस्टिनेशंस (Offbeat destinations of Kumaon Region Uttarakhand) के बारे में बताने जा रहे हैं । उत्तराखंड के कुमाऊँ रीजन ऑफबीट डेस्टिनेशंस की खूबसूरती और यहाँ का शांत वातावरण जरूर आपके मन को मोह लेगा और आप यहाँ बार-बार आने को उत्सुक रहेंगे । उत्तराखंड में ऐसी कई सारी डेस्टिनेशंस हैं जो भीड़भाड़ से कोसों दूर हैं और जहाँ पर जाकर आपको आत्मीय सुख की प्राप्ति होगी ।अगर आप भी अपनी छुट्टियां भीड़ भाड़ वाली जगह से दूर किसी शांत जगह में बिताना चाहते हैं तो उत्तराखंड के कुमाऊँ रीजन की ये जगहें आपके लिए एकदम परफेक्ट साबित होंगी |



1. पंगोट, नैनीताल (Pangot, Nainital)

पंगोट एक छोटा सा हिमालयी गांव है जो नैनीताल से महज पंद्रह किमी की दूरी पर बसा हुआ है । अगर आप प्रकृति प्रेमी और पक्षी प्रेमी हैं तो ये जगह आपके लिए जन्नत से कम नहीं हैं । यहाँ पर आप 250 से ज्यादा प्रवासी और देशी पक्षियों की प्रजातियों को देख सकते हैं। पंगोट पक्षी प्रेमियों के स्वर्ग के रूप में सुप्रसिद्ध है ।



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पंगोट में वर्ष भर कभी भी जा सकते हैं लेकिन यहाँ जाने के लिए सबसे उपयुक्त टाइम मार्च से जुलाई के बीच है । इस गाँव की ओर जाने वाली सड़क से गुज़रते हुए यात्री नैना पीक, स्नो-पीक और किलबरी पक्षी अभयारण्य को भी देख सकते हैं।



2. एबॉट माउंट, लोहघाट (Abbott Mount, Lohaghat)

एबॉट माउंट उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित है और लोहघाट से लगभग 8 किमी दूर है । लोहाघाट समुद्र तल से 7000 फीट ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है । माउंट एबॉट के शीर्ष पर एक खुला मैदान है और इसकी ढलान पर यूरोपीय बंगला उद्यान एवम् बगीचे स्थित है । माउंट एबॉट की स्थापना जॉन हेरोल्ड एबॉट नाम के एक अंग्रेजी व्यवसायी द्वारा 20 वीं शताब्दी में की गयी थी और उसी के नाम पर इस स्थान का नाम माउंट एबॉट रखा गया | इस स्थान को ब्रिटिश राज में अंग्रेजो के शासन काल में बसाया गया था । यह स्थल विश्वभर में अपने अनूठे सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है ।


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माउंट एबॉट घने जंगलो के बीच में स्थित है । वर्तमान में इस जगह पर उस समय काल की तक़रीबन 16 पुरानी हवेलियां आपको देखने को मिल जाएँगी । माउंट एबॉट से नंदाकोट, मैक्तोली, नन्दाघूंट, नंदादेवी जैसे 600 किलोमीटर लंबे हिमालय की चोटियों को आसानी से देखा जा सकता है । यहां आने वाले पर्यटक फिशिंग, फोटोग्राफी और ट्रेकिंग का भी आनंद ले सकते हैं।





3. चौकोरी, पिथौरागढ़ (Chaukori, Pithoragarh)

चौकोरी एक शानदार हिल स्टेशन है, जहां आप प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद उठा सकते हैं और साथ ही कई तरह की रोमांचक गतिविधियों भी कर सकते हैं । चौकोरी समुद्र तल से लगभग 2,010 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ पर आप खूबसूरत हरे-भरे बागों के साथ चाय के बागान भी देख सकते हैं। यहां से सूर्योदय का दृश्य देखने लायक होता है | यह स्थान हिमालय पहाड़ियों के साथ-साथ हरी-भरी वनस्पतियों से घिरा है इसलिए आप यहां नेचर वॉक का शानदार अनुभव ले सकते हैं । पहाड़ियों, बर्फ से ढकी चोटियों और हरे-भरे जंगलों के बीच नेचर वॉक वाकई में आपके लिए एक शानदार अनुभव साबित होगा ।



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इसके अलावा यहाँ पर फोटोग्राफी की जा सकती है । इस स्थल से नंदा देवी, नंदा कोट, चौखंबा और पंचकुला पहाड़ियों के विहंगम दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया जा सकता है । इसके अलावा आप यहां चौकोर गांव का भ्रमण कर सकते हैं। कुमाऊंनी कला, संस्कृति और परंपराओं को समझने के लिए इस गांव का भ्रमण करना एकदम सही साबित होगा । अगर आप उत्तराखंड और पहाड़ी संस्कृति को करीब से देखना और महसूस करने चाहते हैं तो यहां के आसपास के ग्रामीण इलाकों में जरूर जाएं ।


इसके अलावा आप यहाँ पर कई सारे धार्मिक स्थलों की भी यात्रा कर सकते हैं । आप यहां कपिलेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन कर सकते हैं जो की पिथौरागढ़ के सौर घाटी में स्थित है । यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और 10 मीटर अंधेरी गुफा के अंदर स्थित है । इसके अलावा आप यहां के गंगोलीहाट स्थित महाकाली मंदिर के दर्शन कर सकते है । यह मां कालीका का एक प्रसिद्ध मंदिर है जो देवदार के जंगलों के मध्य स्थित है । यहां आने का सबसे आदर्श समय अप्रैल से जून के बीच का होता है।



4. पेओरा, नैनीताल (Peora, Nainital)

हिमालय की गोद में बसा, पेओरा उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित एक छोटा सा गांव है जो 6,600 फीट (1,997 मी) की ऊँचाई पर स्थित है । ये गाँव मुक्तेश्वर से लगभग 10 किमी और अल्मोड़ा से लगभग 23 किमी दूर स्थित है। इस गांव का प्राकृतिक सौंदर्य देखने लायक है । पेओरा नैनीताल और अल्मोड़ा के बीच पड़ता है और यह हिमालय की खूबसूरत चोटियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है ।


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यहां की खूबसूरत छटा और छिपते हुए सूरज का नजारा अलग ही होता है। देवदार, काफल, ओक और बुरांश के पेड़ों से घिरा पेओरा किसी जन्नत से कम नहीं लगता । यहां कई सारे फल जैसे की सेब, आलूबुखारा, खुबानी और आड़ू काफी मात्रा में होते हैं। इसके अलावा पेओरा अपने हर्बल प्रॉडक्ट्स के लिए भी काफी मशहूर है। यहाँ की लोकल हर्बल फैक्ट्री से आप हर्बल प्रोडक्ट्स खरीद सकते हैं । यहाँ पर आप पोरा की पगडंडियों में चलने का अनुभव ले सकते हैं । आप जंगली फूलों, पक्षियों और पौधों की तस्वीरें ले सकते हैं। फोटोग्राफी करने के लिए भी यह एक अच्छा स्थान है ।





5. ज्योलिकोट, नैनीताल (Jeolikot, Nainital)

1219 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन नैनी झील का गेटवे (Gateway of Naini Lake) कहलाता है। नैनीताल मुख्य शहर से इसकी दूरी मात्र 17 km है। आप चाहें तो ज्योलिकोट का बी-ब्रीडींग सेंटर घूम कर शहद निकालने की कला भी देख सकते हैं। यह शहर ताजे फल और शुद्ध शहद के लिए जाना जाता है । यहां कीवी, जैतून और स्ट्रॉबेरी का फल और फूलों का शुद्ध शहद उचित मूल्यों पर मिलता है।


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ज्योलिकोट आने का आदर्श समय मार्च से अक्टूबर तक है अगर आप एक नेचर लवर हैं और प्रकृति के करीब जाकर कुछ समय बिताना चाहते हैं तो ज्योलिकोट आपके लिए एक आदर्श स्थल है। पहाड़ी स्थलों के प्रेमी यहां एक शानदार अवकाश बिता सकते हैं । अगर आप एकांत प्रेमी हैं और किसी एकांत जगह की तलाश में हैं तो यहां आ सकते हैं। फोटोग्राफी के शौकीन यहां के आकर्षक पहाड़ी दृश्यों को अपने कैमरे में हमेशा के लिए कैद कर सकते हैं।




6. Khati, Bageshwar (खाती, बागेश्वर)

खाती कुमाऊं क्षेत्र के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर के पास बसा हुआ आखिरी गांव है । यह गांव पिंडारी नदी के तट पर स्थित अछूता और दर्शनीय गांव है जो ओक और रोडोडेंड्रोन के घने जंगलों से घिरा हुआ है। इसके अलावा यह पिंडारी ग्लेशियर से पहले बसा हुआ आखिरी गांव है इसलिए आज तक इसका व्यवसायीकरण नहीं किया गया और इसे उत्तराखंड के सबसे ऑफबीट पर्यटन के स्थानों में गिना जाता है। साइकिल चलाने, माउंटेन बाइकिंग और प्रकृति की सैर के लिए यह स्थान बेहद लोकप्रिय है।


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7. Sitlakhet, Ranikhet (शीतलाखेत, रानीखेत)

उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित शीतलाखेत पहाड़ी हिल स्टेशन है। शीतलाखेत की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 1900 मीटर है। यह रानीखेत से 24 किमी दूरी पर स्थित है। प्रकृति की छाँव में बसा यह हिल स्टेशन बेहद खूबसूरत हैं । शीतलाखेत अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता हैं । प्रकृति की गोद में बसा यह हिल स्टेशन पर्यटकों को अपनी ओर आर्कषित करता है । 


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शीतलाखेत भले ही एक छोटा सा हिल स्टेशन है परन्तु बेहद शान्त एवं सुखदायी है । यहां आप हिमालय की सुन्दर चोटियों का नजारा देख सकते है । यहाँ पर लोगों का कोलाहल व भीड़भाड़ बहुत कम है। यकीन मानिये यहां पहुंचने के बाद पर्यटक स्वयं को प्रकृति के निकट पाता है । हर तरफ हरियाली जहां शान्ति का अनुभव देती है । वहीं दूसरी तरफ यहां के प्राचीन मंदिर हमें हमारे इतिहास और आस्था से जोड़ती हैं । शहरी जीवन से ऊबे हुए लोग अकसर शान्त वातावरण वाली जगह जाना पसंद करते है । यह जगह उन लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है । शीतलाखेत में ट्रैकिंग, हाईकिंग, कैंपिंग की जा सकती है और ये स्थान फोटोग्राफी करने और पिकनिक मनाने के लिए भी उत्तम है ।


8. लोहाघाट, चंपावत (Lohaghat, Champawat)


उत्तराखंड राज्य के चंपावत जिले से 14 किमी दूर लोहावती नदी के किनारे बसा “लोहाघाट” एक ऐतिहासिक शहर है । शांत जलवायु, हरे-भरे देवदार और ओक के जंगलों से घिरा लोहाघाट बेहद खूबसूरत है | लोहाघाट का एक विशाल ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है जो कई पर्यटकों को आकर्षित करता है । यह स्थान मंदिरों के लिए खासा मशहूर है । पर्यटक यहां के कई पुराने मंदिरों का भ्रमण कर सकते हैं जो कि हिन्दू धर्म के विभिन्न त्योहारों को पारम्परिक तरीके और धूमधाम से मनाने के लिए जाने जाते हैं । होली और जनमाष्टमी के दिन यहां भारी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं । 

आप यहाँ खादी बाजार से खरीदारी कर सकते हैं और पास में ही स्थित खूबसूरत “गलचौरा” का भ्रमण भी कर सकते हैं । साथ ही लोहाघाट, बग्वाल की लड़ाई कार्निवाल के लिए काफी प्रसिद्ध है जो कि रक्षाबंधन के दिन माँ बाराही मंदिर, देवीधुरा के मंदिर प्रांगण में आयोजित किया जाता है |


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लोहाघाट के सौंदर्य का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार नैनीताल के खोजकर्ता पीटर बैरन जब यहां आए थे तो उन्होंने कहा था - 'कश्मीर क्यों जाया जाए अगर इस दुनिया में कहीं स्वर्ग है तो वह यहां लोहाघाट में है ।

लोहाघाट के आसपास कई मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स (Popular tourist spots in Lohaghat) हैं जैसे कि श्यामला ताल, देवीधुरा, गुरुद्वारा रीठा साहिब, एबॉट माउंट, वाणासुर का किला, मायावती (अद्वैत) आश्रम और फोर्टी विलेज । साथ ही आप यहाँ कैंपिंग और नेचर वाक का अनुभव भी ले सकते हैं ।





9. मुक्तेश्वर, नैनीताल (Mukteshwar, Nainital)

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित मुक्तेश्वर सबसे सुंदर स्थानों में से एक है । यह समुद्र सतह से 2286 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । इस स्थान का नाम हिंदू भगवान शिव को समर्पित 350 वर्ष पुराने मंदिर के नाम पर पड़ा है जो मुक्तेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है । ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं। यह हिल स्टेशन ओक और देवदार के सदाबहार जंगलों से ढका हुआ है।

मुक्तेश्वर मंदिर से आप हिमालयी श्रेणी के आश्चर्यजनक और अद्भुत दृश्य देख सकते हैं | आप मुक्तेश्वर से नंदादेवी, नंद कोट, नंदाघुन्टी, त्रिशूल और पंचाचूली जैसी चोटियों को साफ़ तौर पर देख सकते हैं । एक तरफ मुक्तेश्वर घने जंगल से ढका है और दूसरी तरफ यह मनोरम घाटी और हिमालय के शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। मुक्तेश्वर को ब्रिटिशर्स ने 1893 में अनुसंधान और शिक्षा संस्थान (IVRI) के रूप में विकसित किया था ।



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कुमाऊं की पहाड़ियों के एक सुदूर कोने में एक पहाड़ी के ऊपर स्थित यह स्थान फलों के बागों और शंकुधारी जंगलों से घिरा हुआ है । मुक्तेश्वर में जाकर आप एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसे रॉक क्लाइम्बिंग और रैपलिंग का आनंद ले सकते हैं । यहाँ पर पैराग्लाइडिंग भी की जा सकती है । साथ ही ट्रैकिंग और हाईकिंग के लिए भी मुक्तेश्वर परफेक्ट स्पॉट है । मुक्तेश्वर देवदार के घने वृक्षों से घिरा हुआ है और कैंपिंग के लिए एक उपयुक्त स्थान है । जहाँ आप प्रकृति के करीब रहकर कुछ समय बिता सकते हैं ।

इसके अलावा मुक्तेश्वर के नज़दीक काफी सारे टूरिस्ट स्पॉट्स हैं जहाँ पर आप जा सकते हैं । यहाँ पर सीतला नाम का एक सुंदर हिल स्टेशन है जो समुद्र तल से 7000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है । इस स्थान से आप हिमालय पर्वत श्रेणियों के मनोरम दृश्यों को देख सकते हैं । बांज और चीढ़ के घने जंगलो से घिरा यह स्थान 39 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है । यहाँ पर 100 साल से भी पुराना एक ब्रिटिश बंगला आज भी मौजूद है । यह स्थान अपने सुन्दर और प्राकृतिक परिवेश के कारण लोगों को आकर्षित करता है । यहाँ पर आप रिसॉर्ट्स के द्वारा आयोजित किये गए ट्रैकिंग अभियान में भी शामिल हो सकते हैं । सीतला में CHIRAG नाम का एक ग्रामीण विकास संगठन भी है जो वर्ष 1987 से यहाँ पर लगातार कार्य कर रहा है ।




10. मानिला, रानीखेत (Manila, Ranikhet)

रानीखेत से लगभग 87 किमी दूर स्थित मानिला समुद्र तल से 1,820 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर मानिला प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है क्योंकि यहाँ से त्रिशूल, पंचाचूली और नंदा देवी की चोटियों का बेहद मनोरम दृश्य देखने को मिलता हैं । यहाँ से सूर्योदय और सूर्यास्त का विहंगम दृश्य देखना बेहद अद्भुत है । यहाँ पर आपको असीम शांति की अनुभूति होगी । इसके अलावा यहाँ आप मानिला मंदिर में दर्शन करने के लिए भी जा सकते हैं । यह स्थल माँ मानिला मंदिर के लिए प्रसिद्द है । यह मंदिर कत्यूरी लोगों की पारिवारिक देवी माँ मानिला का मंदिर है । देवदार , चीड़ और बांज के वृक्षों से घिरे इस स्थान की प्राकृतिक सुन्दरता देखते ही बनती है । 

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कुछ प्रचलित कथाओं के अनुसार कुछ साल पहले अज्ञात चोरों ने इस मंदिर से मूर्ति को चुराने की कोशिश की लेकिन मूर्ति भारी होने के कारण चोर यहाँ से देवी का हाथ काटकर ले गए और कुछ दूर जाने पर जब वे थक गए तो उन्होंने एक जगह पर आराम किया और जब वहाँ से वे आगे बढ़ने लगे तो वो हाथ वहाँ से नहीं उठा सके तभी से वहाँ पर एक मंदिर का निर्माण हुआ जिसे अब माँ मानिला देवी के शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है ।


अल्मोड़ा जनपद में चीड़ के वृक्षों से आच्छादित ऊँची पहाड़ी के ढलान पर बसे मानिला गाँव में मानिला (माँ अनिला) के दो मंदिर हैं- मानिला मल्ला और मानिला तल्ला । यहाँ से प्रातःकाल में हिमालय श्रेणियों का दीदार करना वाकई में एक शानदार अनुभव है । मल्ला मानिला मानिला देवी का शक्तिपीठ है । इस मंदिर की एक और खास बात है दरअसल मंदिर के परिसर मे एक विशाल पेड़ है जो हमेशा हर मौसम मे हरा रहता है ।इस पेड़ में कोई फल नहीं लगते अभी तक ये एक रहस्य है कि वो पेड़ किस चीज़ का है जो आज तक कई रिर्सचों के बाद भी रहस्य बना हुआ है ।इसे ररहस्यमयी पेड़ भी कहा जाता है । मानिला पर आने के लिए सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से जून तक के महीनो के बीच है । 


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