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Poem on soldier's sacrifice for nation and Army Day poetry in Hindi


Poem on soldier's sacrifice for nation and Army Day poetry in Hindi

लिपटकर तिरंगे में जब बेटा घर पर आता है 
तुम सोच भी न सकोगे कैसा दर्द उसकी 
माँ के सीने में पनप जाता है 
कफ़न में देखकर अपने कलेजे का टुकड़ा 

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उसका दिल चित्कार मचाता है 
कलेजा उस माँ का मानो फटने को आता है 
जिस बेटे को था उसने अपनी बाहो में खिलाया 
आज वही बेटा तिरंगे में लिपटकर घर को है आया 


बेटे को उठ जाने की गुहार वो लगाती है 
अपने दर्द को कहाँ वो छुपा पाती है 
ये मंजर देखकर पत्थर-दिल इंसान की 
आँखों से भी अश्रुधारा निकल आती है 




वो बेटा तो था उस माँ की जान 
जिसने बचने को देश की आन, बान और शान 
गँवा दी अपनी बेशकीमती जान 


धन्य है वो माँ जिसने ऐसे वीर सपूत को 
अपनी कोख में पाला 
आज देश की खातिर उस बेटे ने 
अपनी जान को कुर्बान कर डाला 




बेटा घर कब आएगा ये हर समय उस माँ ने पूछा 
इस तरह लौटेगा बेटा घर ये कहाँ था माँ ने सोचा 
जिस बेटे की थी वो मुरीद 
आज वही बेटा हो गया शहीद 


नम आँखों से कर तो दी माँ ने बेटे की विदाई 
लेकिन अपने मासूम बेटे की याद में पल-पल
उस माँ की आँख है भर आयी 




नम आँखों से बेटे को याद कर वो बोली 
बेटा तू है मेरा अभिमान 
तू है इस देश की असली शान 


देश की खातिर तूने कर दिए अपने प्राण न्यौछावर
धन्य हो गयी मैं ऐसी संतान को पाकर 
अगले जन्म भी तू मेरा बेटा बनकर आना 
खुशनसीबी है तेरी जैसी संतान को पाना 



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