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बसंत पंचमी 2019 तिथि, समय, शुभ मुहूर्त, कथा, इतिहास, महत्व, तथ्य एवं उत्सव - Basant Panchami in Hindi


बसंत पंचमी 2019 तिथि, समय, शुभ मुहूर्त, कथा, इतिहास, महत्व, तथ्य एवं उत्सव - Basant Panchami 2019 in Hindi

बसंत पंचमी माघ के पांचवे दिन मनाया जाने वाला त्यौहार है | आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं | हम यहाँ पर बसंत पंचमी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे कि बसंत पंचमी 2019 तिथि, समय, शुभ मुहूर्त, कथा, इतिहास, महत्व, तथ्य एवं उत्सव - Basant Panchami in Hindi आप सभी के समक्ष लेकर आये हैं | 



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बसंत पंचमी

बसंत पंचमी को वसंत पंचमी या श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है | बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती (विद्या की देवी) उनकी पूजा की जाती है | इस त्यौहार के दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं | 




बसंत पंचमी 2019 तिथि

वर्ष 2019 में बसंत पंचमी 10 फरवरी को सम्पूर्ण भारतवर्ष और कुछ अन्य देशों जैसे इंडोनेशिया, नेपाल, बांग्लादेश में मनाई जायेगी |

बसंत पंचमी 2019 समय

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त पांच घंटे सताइस मिनट तक रहेगा जो प्रातः सात बजकर सात मिनट से शुरू होकर दोपहर  बारह बजकर पैंतीस मिनट तक रहेगा | 


बसंत पंचमी 2019 सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त सुबह सात बजकर सात मिनट से शुरू होकर दोपहर बारह बजकर पैंतीस मिनट (7:07 AM to 12:35 PM) तक रहेगा | 





बसंत पंचमी कथा / बसंत पंचमी इतिहास

कहा जाता है कि सृष्टि के प्रारंभिक काल में जब भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीव, जंतुओं और मुनष्य योनि  की रचना की लेकिन ब्रह्मा अपनी सृजना से खुश ना थे | उन्हें महसूस हुआ कि कोई कमी अवश्य रह गयी है तभी चारों ओर मौन छाया रहता है | ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल छिड़का | जल छिड़कते ही वृक्षों के बीच से एक शक्ति का प्राकट्य हुआ | यह एक स्त्री थी जिसके एक हाथ में वीणा व दूसरे हाथ  वर मुद्रा में था | अन्य हाथों में माला और पुस्तक थी | इसके बाद ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजने का अनुरोध किया | जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया संसार के सभी जीव, जंतुओं और मनुष्य योनि को वाणी मिल गयी | पवन के चलने पर सरसराहट कि आवाज़ आने लगी और जलधारा के बहने की आवाज़ भी आने लगी | उसके बाद से ब्रह्मा जी ने इस देवी को 'सरस्वती की देवी' कहा | देवी सरस्वती को बुद्धि, विज्ञान, संगीत, ज्ञान और कला की देवी माना जाता है | बसंत पंचमी को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है और इस दिन इनकी पूजा-आराधना की जाती है | 


बसंत पंचमी महत्व

बसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति का हर एक कण खिल उठता है | बसंत पंचमी का त्यौहार भी बसंत के आगमन के उल्लास में ही मनाया जाता है | इसी दिन से प्रकृति में हरियाली का आवागमन होने लगता है | पूरी प्रकृति खुशबू में नहायी हुई सी प्रतीत होती है | पूरे देश में इस दिन देवी सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है | माँ सरस्वती को बुद्धि, विद्या एवं सुरों की प्रदाता माना जाता है |





बसंत पंचमी तथ्य

बसंत पंचमी को देवी सरस्वती के जयंती के रूप में मनाया जाता है | इसके अलावा इस से जुड़ी कुछ अन्य कथाएं भी प्रचलित हैं जिनमें से एक रामायण काल से सम्बंधित है | जब रावण द्वारा माता सीता का अपहरण किया गया था तो उन्होंने अपने आभूषणों को रास्ते में फेंका था ताकि भगवान राम को उनके अपहरण मार्ग के संकेत मिल सके | माता सीता की खोज करते हुए भगवान राम दंडकारण्य पहुंचे जहाँ उन्हें शबरी देवी मिली | वहां पर उन्होंने शबरी के झूठे बेर खाकर उनके जीवन का उद्धार किया | उस दिन वसंत पंचमी का ही दिन था जिस कारणवश आज भी शबरी देवी मंदिर में वसंत उत्सव मनाया जाता है | 


बसंत पंचमी उत्सव

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है | साथ ही पुस्तकों एवं वाद्य यंत्रो की भी पूजा की जाती है | सभी लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं | यह त्यौहार किसानो के लिए भी महत्वपूर्ण होता है | इस समय खेत खलिहानो में सरसों के पीले फूल लहराते हुए नज़र आते हैं | इस त्यौहार के दिन लोग दान भी देते हैं | इसके अलावा पतंग उड़ाकर भी इस त्यौहार का जश्न मनाया जाता है |  




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