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Why parents shouldn't decide their child's career?


Why parents shouldn't decide their child's career?


माँ बाप अपनी इच्छाओ का बोझ 
क्यों लाद  देते हैं बच्चों पर ?
क्यों कहते है तुझे बनना है
डॉक्टर या फिर इंजीनियर ?

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उनकी इच्छा पूछे बगैर 
तय करने लगते है उनकी डगर
बहुत कठिन होता है बच्चों के लिए
वो सफर जिसमे वो चलना नहीं चाहते 

माँ बाप की ज़िद से चल पड़ते है मगर
कोई बच्चों से भी तो पूछे
क्या कहता है उनका जिगर ? 
हो सकता है उनमे कोई और हुनर

जिसकी आपको न हो खबर
उनके लिए इतनी मत कसो कमर
कि वो होते चले जाये तुमसे दूर
और जीना भी ना हो उनको फिर मंजूर

जो नहीं करना चाहते वो करने को 
मत करो तुम उनको मजबूर
प्यार से उनकी इच्छा पूछकर तो देखो एक बार 
आपके दिल के डर भी हो जायेंगे दूर

चलने दो उनको उस राह पर 
जहाँ अपनी मंजिल आती है उनको नज़र 
देखना चाहते हो उनको कामयाब तो 
जाने दो उनको अपनी डगर

चुनने दो उन्हें अपनी मर्ज़ी से carrier
तुम मत बनो उनकी राह का barrier
बच्चों की इच्छाओ से ना रहो अनजान 
आप दोगे साथ तभी बना,पाएंगे वो अपनी पहचान 
अपनी इच्छाएं थोपकर ना,करो उनको परेशान

चंद नम्बरों से ना आंको उनकी प्रतिभा 
इतिहास है गवाह कम अंक वालों को भी 
हुआ है हासिल ऊँचा दर्ज़ा
दुनिया में चलता आ रहा है ये चलन

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अंको से करते है लोग किसी 
इंसान की प्रतिभा का आकलन 
अंको से नहीं चलता पता, किस को है कितना ज्ञान 
क्यूंकि अंको से नहीं जीवन में 
दिमाग से मिलती है पहचान 

अपने बच्चों की किसी ओर, से मत करो तुलना 
हमेशा उनकी कमियों को नहीं 
खूबियों को शुरू करो गिनना 

कभी हो जाएँ अगर वो असफल
उनके मनोबल को गिराओ नहीं, बल्कि उसे बढ़ाओ 
और अच्छे माँ-बाप कहलाओ 

माँ-बाप का काम है बच्चों को, सही राह दिखाना 
ना कि उन्हें उनकी राह से भटकाना

दूसरों के सामने ना उनकी खामियां गिनाओ 
तुम्हे लगती है कोई कमी तो 
प्यार से उन्हें समझाओ 
दूसरों की नज़र में ना उनको गिराओ

अपने फ़र्ज़ को अच्छे से निभाओ 
प्यार है उनसे उसे मत छुपाओ 
अपने रिश्ते को अटूट बनाओ 
डाँट से नहीं बल्कि प्यार से,बच्चों को सिखाओ 

अगर है वो सही तो उनका साथ निभाओ 
है वो गलत तो उनको सही राह दिखाओ 
अपना फ़र्ज़ तुम बखूबी निभाओ 

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