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वक़्त की रफ़्तार - Motivational Hindi poetry on 'The value of Time'


वक़्त की रफ़्तार  - Motivational Hindi poetry on 'The value of Time'


रेत की तरह हाथ से फिसल जाता है
पकड़ना चाहो तो भी पकड़ में नहीं आता है 
अच्छे अच्छों को सबक सीखा जाता  है
दोस्तों ये वक़्त कहलाता है |

वक़्त को अपनी मुट्ठी में ,करना नहीं होता आसान
जिसने ऐसा कर लिया समझो, छू लेगा वो आसमान
अच्छा या बुरा नहीं होता वक़्त
ये तो हैं हालात जिन पर, निर्भर करता है वक़्त

अच्छे हो हालात  तो लगता है, बस यूँ ही बीतता रहे वक़्त
बुरे हो हालात  तो लगने , लगता है वक़्त भी सख्त
हालात  के कारण वक़्त को , बदलने में नहीं लगती देर
आज जो हैं ऊंचाई पर, कल हो सकते हैं ढेर


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वक़्त का तेजी से चलता है पहिया
इसकी रफ़्तार को कोई, ना रोक पाया है भैया 
अर्श से फर्श पर पहुँचने , में नहीं लगती देर 
अहम में आकर इंसान ये बात, समझ ही कहाँ पाया है खेर
जो उसको समझाए इंसान, उसको ही कह देता है गैर

वक़्त किसी के साथ भी, खेल सकता है खेल
बड़ी तेजी से चलती है, वक़्त की रेल
कामयाबी पाने के लिए , वक़्त का पाबंद होना है ज़रूरी
पाबन्दी को ना समझे कभी मज़बूरी
तब मंजिल को पाने के लिए ,वक़्त भी देगा तुमको मंजूरी

जब बादल भी हर जगह हैं बरसते
फिर तुम क्यों अपनी ज़िन्दगी 
किस्मत के भरोसे हो छोड़ते ?

इस धरती पर इंसान के रूप में 
जन्म  ले लिया जब एक बार
वक़्त की पाबन्दी को समझकर, मेहनत करते रहो बारम्बार 
एक ना एक दिन सफलता , तुम्हारे कदम चूमेगी यार 

वक़्त के साथ जिसने सीख लिया चलना 
मंजिल को पाना उसके लिए नहीं रहेगा सपना 
अपनी मंजिल को पाना नहीं होता आसान
लेकिन जिसने वक़्त के साथ सीख लिया चलना 

भगवान के लिए भी नामुमकिन है उसको
उसकी मंजिल पाने से रोकना 
चलते रहो वक़्त के साथ
कामयाबी मिलेगी तुमको हाथों हाथ

किस्मत पर ना छोड़ो कोई भी बात
मेहनत करो दिन हो चाहे रात
ताकि मंजिल भी हो जाये मजबूर


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