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मेरा पहला घर मेरा मायका - My First Home 'Maayka' ("Maayka vs Sasural")


मेरा पहला घर मेरा मायका - My First Home 'Maayka'


एक लड़की जब अपने मायके है आती 
मानो उसको फिर से उड़ने की, आज़ादी है मिल जाती
ससुराल में दी जाती हैं उसे, सौ तरह की हिदायतें
लेकिन मायके में आकर वो, करती रहती है नयी-नयी फरमाईशे

जिस घर में बिताये उसने इतने साल
अब उस घर में आने के लिए करना, पड़ता है लम्बा इंतज़ार
फिर लेनी होती है मायके,जाने की इजाजत 
मिलते ही इजाजत मानो, मिल जाती है उसको जन्नत

पूरी हो गयी हो जैसे,उसकी कोई मन्नत
ससुराल में होती है वो बहुरानी
मायके आते ही बन जाती है महारानी
ससुराल में करती है वो हर एक काम 
लेकिन मायके में चाहिए होता, है उसको full आराम


Poem on Maayka



मायके में आकर घर को, कर देती है गुलज़ार
घरवालों को लगता है, जैसे लौट आयी है बहार 
जब वापस आती है ससुराल, मायका फिर से हो जाता है सूना
यही तो है दस्तूर लड़की को, ससुराल में ही पड़ता है जीना


मायके से पहुँचकर ससुराल, कुछ दिन नहीं लगता उसका मन
कुछ समय बाद मायके, जाने को फिर से करने लगती है जतन
लड़की का मायके से रहता है, एक अलग ही लगाव
मायके की तरफ होता है उसका झुकाव


मायके जाने को करता है दिल बार-बार
मायके में उसे प्यार मिलता है बेशुमार 
ससुराल में उसे लुटाना पड़ता है प्यार अपार 
यही तो फर्क है मायके और ससुराल में यार


  

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